Saturday, October 15, 2016

कोई गज़ल गा दीजिए

कोई गज़ल गा दीजिए

दर्द से दर्द की दवा कीजिये
हम है बैठे ग़जल कोई गा दीजिये।
एक नन्हा दिया जल रहा है कहीं
साथ जलकर उसे हौसला दीजिये।
फासलों ने दिए जख्म है,दर्द हैं
दर्द में फासलों को मिटा दीजिये।
तजुर्बा बड़े काम की चीज है
क्या मिला जिंदगी से बता दीजिये।
जिसकी मेहनत का हासिल है ये आसमाँ
उसको घर से न अपने जुदा कीजिये।
देवेंद्र प्रताप वर्मा”विनीत”

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