दुख के सागर की लहरों से
डटकर लड़ना सीख लिया है
तेरे सहारे फिर से मैंने
कोशिश करना सीख लिया है।
जीने मरने की कसमों की
नही रही परवाह कोई अब
एक दूजे में जब से हमने
जिंदा रहना सीख लिया है।
न चाहत थी , न हसरत थी , तन्हा जीने की आदत थी , तुम आए तो दुनिया बदली, हसरतों को इक मंजिल सी मिली, दिल ने चाहा तुम्हें मांग लूँ रब से, तुम ही मेरी मंजिल अगली ।
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