Wednesday, July 31, 2024

मेहरबां हो गए

 फूल थे जो कभी बागवां हो गए

थे अकेले चले कारवां हो गए।

चंद सिक्के तिजोरी में क्या आ सजे

जाने कितनों के वो जानेजाँ हो गए।

भूल थी कुछ न बदलेगा जाने के बाद

घर कितने किराए के मकां हो गए।

साजिश है यकीनन नेमत नही कोई

पल हंसी के जो यूं मेहरबां हो गए।


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