फूल थे जो कभी बागवां हो गए
थे अकेले चले कारवां हो गए।
चंद सिक्के तिजोरी में क्या आ सजे
जाने कितनों के वो जानेजाँ हो गए।
भूल थी कुछ न बदलेगा जाने के बाद
घर कितने किराए के मकां हो गए।
साजिश है यकीनन नेमत नही कोई
पल हंसी के जो यूं मेहरबां हो गए।
न चाहत थी , न हसरत थी , तन्हा जीने की आदत थी , तुम आए तो दुनिया बदली, हसरतों को इक मंजिल सी मिली, दिल ने चाहा तुम्हें मांग लूँ रब से, तुम ही मेरी मंजिल अगली ।
कहीं भी जाऊँ गुल दोस्ती के खिल जाते हैं मुझे मेरे जैसे लोग हर जगह मिल जाते हैं। गरीबों के लिए ही बने हैं सारे नियम कायदे अमीरों के लि...
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